कौन कहता है ,आज अनारी हैं औरतें;
जबकि खींच रही मर्दों की गाड़ी हैं औरतें।
गृहस्थी के बोझ से, डरते हुए मानव को,
बनकर मिसाल सिखा रही,आज की औरतें॥
कर्तव्य के निर्वाह से, मुख मोड़ते हुए मानव को,
आज नई राह दिखा रही हैं औरतें।
लहू को पसीने में बदल अपने तन के,
पुरूषों को श्रम-साध्य बना रही हैं औरतें॥
बैंक हो या दफ्तर, या कि पाठशाला,
कार्य का हर क्षेत्र, इनके लिए मधुशाला।
कहाँ लौ बखान करो, इनकी बड़ाई
प्रशासन में भूमिका, निभा रही हैं औरतें॥
नारी आज अबला नही,आंखों में ना पानी,
सार्थक है आज कि नारी कि जवानी।
पुरूषों से सताई हुई, युग - युग से नारी,
रंगमंच पे पुरूषों को नचा रही हैं औरतें॥
खेत से खलिहान तक, नारी ही नारी;
आज की नारी की , करामात है न्यारी।
चारदीवारी में कैद नही आज की नारी,
उत्पादन में नई क्रांति,ला रही हैं औरतें॥
भीरु नहीं,नारी है साक्षात दुर्गा,
शक्ति रूपिणी नारी की होती है पूजा.
मनु , दुर्गावती, चाँदबीवी , इंदिरा,
मिसाल ये बहादुरी की, आज की औरतें...
- सुरेश चंद्र गुप्ता , रूबी गुप्ता.
romancing life...
- shashiprabha
- bombay, India
- I like nonsense...it wakes up brain cells.Fantasy is a necesarry ingredient in lyf;its a way of looking at lyf through of da wrong end of telescope,which is wat i do nd dat enables u to laugh at life's realities....!
Thursday, April 9, 2009
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रंगमंच पे पुरूषों को नचा रही हैं औरतें॥
ReplyDeleteencore mate...
take a bow