romancing life...

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bombay, India
I like nonsense...it wakes up brain cells.Fantasy is a necesarry ingredient in lyf;its a way of looking at lyf through of da wrong end of telescope,which is wat i do nd dat enables u to laugh at life's realities....!

Thursday, May 7, 2009

शहर के हो गए हैं!!!

एक प्यारा सा गाँव , जिसमें पीपल की छाँव
छाँव में आशियाँ था, एक छोटा मकाँ था,
छोड़कर गाँव को, उस घनी छाँव को,
शहर के हो गए हैं, भीड़ में खो गए हैं...

वो नदी का किनारा,जिसपे बचपन गुजरा,
वो लड़कपन दीवाना,रोज़ पनघट पे जाना,
फिर आई जवानी, बन गए हम कहानी,
छोड़कर गाँव को, उस घनी छाँव को,
शहर के हो गए हैं..भीड़ में खो गए हैं॥

कितने गहरे थे रिश्ते, लोग थे या फ़रिश्ते,
एक टुकडा ज़मीं थी , अपनी जन्नत वहीँ थी,
हाय ये बदनसीबी! नाम जिसका गरीबी,
छोड़कर गाँव को , उस घनी छाँव को,
शहर के हो गए हैं,भीड़ में खो गए हैं॥

यह तो परदेस ठहरा, देश फिर देश ठहरा,
हादसों की ये बस्ती, कोई मेला ना मस्ती,
क्या यहाँ ज़िन्दगी है,हर कोई अजनबी है,
छोड़कर गाँव को,उस घनी छाँव को,
शहर के हो गए हैं, भीड़ में खो गए हैं....

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